ISSN 2277 260X   

 

International Journal of

Higher Education and Research


 

 

Thursday, 5. July 2018 - 16:58 Uhr

कोटि-कोटि प्रणाम - अवनीश सिंह चौहान


abnish2-1मैंने विश्वविद्यालय के एक पदाधिकारी को पिछले दिनों पत्र लिखा, जिस पर प्रतिक्रिया करते हुए मेरे एक प्राध्यापक मित्र ने व्हाट्सएप पर लिखा कि आपको पदाधिकारियों से संबंध खराब नहीं करने चाहिए। मैंने उन्हें कहा कि मैं सत्य को नहीं छोड़ सकता। सत्य के मार्ग पर चलना यदि अपराध है, तो बेशक आप मुझे दोषी मान सकते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि इसीलिए कुछ लोग विश्वविद्यालय में आपको नापसंद करते हैं। मैंने उनको जवाब दिया कि लोगों को नापसंद करने का हक होना चाहिए। मैं ऐसे लोगों को भी पसंद करता हूँ। और एक बात और कहना चाहूंगा- 'जो लोग मेरे बारे में बुरा-भला कहते हैं, मेरी आलोचना करते हैं या कुछ और कपट रखते हों, वे लोग निश्चित रूप से मुझ पर कृपा कर रहे हैं, क्योंकि इससे मेरा ही हित होने वाला है। इससे मेरे पाप तो कटेंगे ही, यदि उनकी बात मुझ तक पहुंची तो हो सकता है मुझे उनकी कोई बात अच्छी लग जाए और उससे मेरा कल्याण हो जाए। ऐसे सभी महानुभावों को मैं कोटि-कोटि प्रणाम करता हूं।'


 

 

 


Tags: अवनीश सिंह चौहान Abnish Singh Chauhan Dr Abnish Singh Chauhan Hindi Literature 

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Thursday, 5. July 2018 - 16:52 Uhr

क्या आप डॉ असित कुमार सिंह को जानते हैं? - अवनीश सिंह चौहान


asit-kआज एक ऐसे व्यक्ति से परिचय कराने जा रहा हूं जिन्होंने अपने क्षेत्र की जन- समस्याओं को सुलझाने/ जनहित में कार्य करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन खपा दिया। नाम है डॉ असित प्रताप सिंह (प्रतापगढ़, उ प्र)। विलक्षण व्यक्तित्व के धनी, समाजसेवी, उदारमना, निर्भीक, जुझारू डॉ असित कुमार सिंह ने अनेकों बार अपने क्षेत्र के दिग्गज नेताओं, अधिकारियों, बाहुबलियों के भ्रष्ट और गैरजिम्मेदाराना आचरण के विरुद्ध आवाज उठाई और जन-समस्याओं को उजागर कर उनके हल खोजे। आज भी वह इसी प्रकार का कार्य उतने ही उत्साह से करते आ रहे हैं। कई बार उन्हें सफलता भी मिली, कई बार असफल भी हुए, कई बार उन्हें अपमानित किया गया, कई बार उनकी उपेक्षा की गई, कई बार उन्हें हड़काया गया, कई बार उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिली, लेकिन वह अपने मार्ग से विचलित नहीं हुए। हद तो तब हो गयी जब पिछले दिनों उन्होंने जनपद के अधिकारियों द्वारा किये गए भ्रष्टाचार की जांच कराए जाने की मांग की तो उन्हें अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा (यद्यपि उन्होंने हाईकोर्ट- इलाहाबाद में याचिका दायर कर दी है, जिस पर अभी सुनवाई होनी है)। सच की लड़ाई में उनका रोजगार भी चला गया! मैंने एक बार उनसे पूछा था कि आप यह सब क्यों करते हो? अब तो आपका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता है, तनाव बढ़ने पर ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, कई-कई दिन तक बीमार पड़े रहते हो, रोजगार भी जाता रहा, अब तो यह सब छोड़ दो। तब वह बोले, "अब यह सब नहीं छोड़ सकता, भले ही प्राण छूट जाएं। यह सब मैं नहीं करूंगा, तो कौन करने वाला है? मैंने तय कर लिया है कि अपनी अंतिम सांस तक संघर्ष करता रहूंगा, चाहे कोई साथ दे न दे।" मैं यह सुनकर चुप हो गया था। आज मन हुआ कि इस अदभुत समाजसेवी को याद कर लूँ कुछ इस तरह...


 


Tags: डॉ असित कुमार सिंह अवनीश सिंह चौहान Abnish Singh Chauhan Dr Asit Kumar Singh Social Activist 

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Thursday, 5. July 2018 - 16:49 Uhr

Yuddha to Buddha: Roadmap of Indias Security


ashok-k-singhYuddha to Buddha: Roadmap of India's Security
by
Ashok Kumar Singh

ISBN 978-81-7977-617-9
Publisher: Prakash Book Depot, Bareilly
Price: Rs. 365.00
pp. : 194 + xiv
....
List of Contents:

Yuddha to Buddha
The Miracle that was India
Parameter’s of Security
Dynamics of Development & Chapter of Security
Valour, War, Peace & Civilization
Challenges in New World Order
Confidence Building Umbrella & Security Horizon
Indian Security & Strategic Milieu
Conclusion
....
The book is an attempt to look at the interface of security, spirituality and philosophy of war and peace in changing and challenging strategic milieu.

 

Post by Dr Abnish Singh Chauhan


 


Tags: Yuddha to Buddha: Roadmap of India's Security Ashok Kumar Singh Book 

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Thursday, 5. July 2018 - 16:47 Uhr

आतंकवाद 3.0


terrorismयह पुस्तक एक नए प्रकार के आतंकवाद से पाठकों का परिचय कराती है। इसमें आधुनिक इस्लामिक आतंकवाद के विकास को तीन चरणों में विभाजित करते हुए इस नए किस्म के आतंकवाद को आतंकवाद 3.0 की संज्ञा दी गई है। आतंकवाद 3.0 के लेखक हैं गोरखपुर विश्वविद्यालय के सीनियर रिसर्च फैलो अमित त्रिपाठी जी। टीवी पत्रकार रह चुके युवा लेखक अमित त्रिपाठी जी मूलतः गोरखपुर के निवासी हैं और वर्तमान में वह 'आतंकवाद एवं मीडिया' विषय पर गोरखपुर विश्वविद्यालय में शोधरत हैं। प्रकाशक - प्रकाश बुक डिपो, बड़ा बाजार, बरेली, उत्तर प्रदेश, प्रथम संस्करण- 2018, मूल्य- ₹220, पृष्ठ- 146

Post by Dr Abnish Singh Chauhan


 


Tags: आतंकवाद 3.0  Book Review 

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Thursday, 5. July 2018 - 16:43 Uhr

उपलब्धि - ​अवनीश सिंह चौहान


dr-mahesh-diwakar

 

एक लंबे अंतराल के बाद मुरादाबाद के प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं शिक्षाविद परम श्रद्धेय डॉ महेश दिवाकर जी से मिलना हुआ, उनके घर पर। 100 से अधिक पुस्तकों के प्रणेता डॉ दिवाकर जी अपने साधना कक्ष में विराजमान, लिखने-पढ़ने में मस्त। उनके चारों तरफ पुस्तकें, पत्रिकाएं अखबार पसरे हुए। कक्ष किताबों, सम्मान पत्रों से भरा हुआ। देदीप्यमान। खिल-खिलाता हुआ चेहरा, चमकती आँखें। उन्हें प्रणाम किया। वह बड़े प्रेम से बोले- बड़े दिनों बाद आए हो, अवनीश, सब कुशल तो है, लिखना-पढ़ना कैसा चल रहा है, आदि। पूर्व की भांति ही उपहारस्वरूप अपनी कई पुस्तकें मुझे दी। निशुल्क। मुझसे ही नहीं, कभी किसी और से भी पुस्तक के बदले कोई पैसा नहीं लिया; किसी को भी पुस्तक नहीं बेची। स्वयं पुस्तक छपवाकर, वह साहित्यप्रेमियों को निशुल्क पुस्तकें बांटते रहे। ऐसे विलक्षण साहित्य सेवा करने वाले शब्द साधकों से मिलना अपने आप में मेरे लिए एक बड़ी उपलब्धि है।


 


Tags: Dr Mahesh Diwakar डॉ महेश दिवाकर  ​अवनीश सिंह चौहान 

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